भोपाल में फ्री मिलेंगी मिट्टी की ईकोफ्रेन्डली गणेश प्रतिमाएं - क्लिक करें | No 1 Hindi News Portal of Central India (Madhya Pradesh) | हिन्दी समाचार

भोपाल में फ्री मिलेंगी मिट्टी की ईकोफ्रेन्डली गणेश प्रतिमाएं

Saturday, August 27, 2016

;
भोपाल। भोपाल में 1 से 3 सितम्बर तक मिट्टी की ईकोफ्रेन्डली गणेश प्रतिमाएं फ्री मिलेंगी। आपको केवल इतना करना है कि बताए गए स्थान पर पहुंचे। वहां आपको एप्को का स्टॉल मिलेगा। यहां से आप अपनी पसंद की गणेश प्रतिमा फ्री घर ले जा सकेंगे। यह स्टॉप भोपाल में 3 स्थानों पर लगाया जाएगा। 

स्टॉल वाहन 1 सितम्बर को गणेश मंदिर पिपलानी, 2 सितम्बर को मंदाकिनी ग्राउण्ड कोलार रोड और 3 सितम्बर को दशहरा मैदान बिट्टन मार्केट पर शाम 5 से 7 बजे तक रहेंगें। इसके अलावा विभिन्न स्कूलों में एप्को के वाहन पहुंचेंगे। दरअसल, यहां आपको अपने हाथ से मिट्टी की गणेश प्रतिमा बनाना सिखाया जाएगा। मिट्टी भी यहीं से मिलेगी। आप एप्को के कुशल कारीगरों के निर्देशन में हाथों हाथ अपनी पसंदीदा गणेश प्रतिमा बनाकर अपने घर ला सकते हैं। 

आयुक्त, पर्यावरण श्री अनुपम राजन ने बताया कि पीओपी से होने वाली हानियों से जन-सामान्य को अवगत कराने और ईको फ्रेन्डली गणेश मूर्ति के उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए शहर के विभिन्न स्थान पर प्रशिक्षण का आयोजन किया जा रहा है। प्राय: घरों में स्थापित की जाने वाली मूर्तियाँ पीओपी और रासायनिक रंगों से बनी होती है, जो विसर्जन पर पर्यावरण समस्याओं को जन्म देती हैं। प्रशिक्षण वाहन में कच्ची मिट्टी से आसान और रोचक तरीके से मूर्ति बनाना सिखाया जाएगा। लोग मात्र 5 मिनट में ही अपने खुद के गणेश जी बना लेंगे। विसर्जन भी घरों में ही आसानी से हो जाएगा।

पीओपी मूर्तिकारों की कार्यशाला 31 अगस्त को
एप्को द्वारा 31 अगस्त को शाम 3 से 5 बजे तक पर्यावरण परिसर ई-5, अरेरा कॉलोनी, भोपाल में पहली कार्यशाला की जा रही है। कार्यशाला में पर्यावरण परिसर के अधिकारी-कर्मचारी और पीओपी से मूर्ति बनाने वाले लोगों को आमंत्रित किया गया है। मूर्ति बनाना सिखाने के साथ ही इसमें पीओपी मूर्तिकारों को पीओपी और रासायनिक रंगों के पर्यावरण पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों की जानकारी भी दी जाएगी। कार्यशाला में आम नागरिक भी भाग ले सकते हैं।

हमारी परंपरा में नहीं है पीओपी मूर्ति पूजा
आध्यात्मिक रूप से विश्व में अपना वर्चस्व स्थापित करने वाली भारतीय संस्कृति में विसर्जन करने वाली प्रतिमाओं का निर्माण मिट्टी, गोबर, सुपारी आदि से करने की समृद्ध परंपरा है। ये वस्तुएँ जल में घुल भी जाती हैं और नदी-तालाब की तलछट को प्रदूषित भी नहीं करती। वहीं पीओपी अघुलनशील, तलछट के लिए हानिकारक और रासायनिक रंग पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए दुष्प्रभावी हैं।
;

No comments:

Popular News This Week