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मप्र के 90 हजार शिक्षक 5 सितम्बर को 'अपमान दिवस' मनाएंगे | कर्मचारी समाचार

Sunday, August 21, 2016

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इंदौर। राज्य सरकार ने प्राचार्यों, व्याख्याताओं, लिपिकों एवं भृत्यों को तो समयमान वेतनमान का लाभ दे दिया है, जबकि सहायक शिक्षकों, शिक्षकों एवं प्रधान अध्यापकों से विभेदकारी नीति अपनााते हुए इस लाभ से वंचित किया गया है। निकायों में पदस्थ अध्यापकों को पांच साल की सेवा के उपरांत पदोन्नत किया जा रहा है, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ सहायक शिक्षकों को तीन दशक से ज्यादा की सेवा के उपरांत एक भी पदोन्नति नहीं दी गई है। 

एक तरफ सरकार शिक्षकों के सम्मान की बात करती है, वहीं दूसरी तरफ उनके साथ दोयम दर्जें का व्यवहार कर अपमान कर रही है। प्रमोशन एवं समयमान वेतनमान देने में भेदभाव से शिक्षकों में जबर्दस्त आक्रोश है। अगर उनके साथ शिक्षक दिवस तक न्याय नहीं किया गया तो शिक्षक पांच सितंबर को सम्मान की बजाय अपमान दिवस मनाएंगे एवं शिक्षक दिवस का बहिष्कार करेंगे।

यह बात समग्र शिक्षक व्याख्याता एवं प्राचार्य कल्याण संघ मध्यप्रदेश के तत्वावधान में यहां आयोजित प्रांतीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए संगठन के प्रांतीय संयोजक सुरेशचंद्र दुबे ने कही। उन्होंने कहा कि इसके बाद भी न्याय नहीं मिला तो आंदोलन को और उग्र किया जाएगा। संगठन के प्रांताध्यक्ष मुकेश शर्मा ने कहा कि किसी भी मूवमेंट को चलाने के लिए त्याग की जरूरत होती है। हमारे साथी अब सरकार से भिड़ने के लिए तैयार है। सरकार उन्हें ही फायदा पहुंचाती है, जो उसका विरोध करते हैं। हम बरसों से मौन साधक की तरह अपनी सेवा को अंजाम देते आ रहे हैं, इसलिए हमारी याचना को भी अधिकारी अनसुना करते आ रहे हैं। 

समयमान वेतनमान देने में भेदभाव के विरोध में शिक्षकों को न्यायालय की शरण लेना पड़ रही है। अधिकारी इस मामले में अवमानना याचिका दायर होने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं कर रहे हैं। इसलिए अब समय आ गया है हम इस अपमान एवं भेदभाव का खुलकर एवं जबर्दस्त विरोध दर्ज कराएं। सम्मेलन को संगठन के मार्गदर्शक रामनारायण लहरी ने राज्य सरकार निकायों में पदस्थ सहायक अध्यापकों को पांच से सात साल की सेवा के उपरांत पदोन्नत कर रही है, जबकि स्कूल शिक्षा विभाग में पदस्थ सहायक शिक्षकों को 30 से 40 साल की सेवा के उपरांत भी पदोन्नत नहीं किया गया है। 

दीर्घकालीन सेवा के पश्चात इन सहायक शिक्षकों को शिक्षक पदनाम दिए जाने से सरकार पर कोई वित्तीय भार भी नहीं पड़ने वाला है। सरकार दूसरे कर्मचारियों को वित्तीय भार सहन करके लाभान्वित कर रही है, जबकि सहायक शिक्षकों को वित्तीय भार नहीं पड़ने पर भी प्रमोशन देने से परहेज कर रही है। प्रमोशन की आस में शिक्षक जिस पद पर नियुक्त हुए थे, उसी पद पर रिटायर होते जा रहे है। इन शिक्षकों के लिए दूसरे विभाग के प्रमोट हुए अपने कनिष्ठ कर्मचारियों के अधीन कार्य करना अपमान के घूंट पीने जैसा है। सतत अपमान से उनमें आक्रोश पनप रहा है। इस अवसर पर पुरस्कृत शिक्षकों ने श्रेष्ठ सेवा के बदले पुरस्कार स्वरूप मिले राष्ट्रपति और राज्यपाल पदक भी सरकार को वापस लौटाने का निर्णय लिया। इसके लिए पुरस्कृत शिक्षकों से सहमति पत्र भरवाए गए। यह अभियान समूचे प्रदेश में चलाया जाएगा। 

संगठन के जिला संयोजक संतोष जैन ने बताया कि संगठन के बैनर तले प्रदेश के शिक्षक अपने हक के लिए लामबंद हो गए हैं। सहायक शिक्षकों की सतत उपेक्षा से पुरस्कृत शिक्षक भी दुखी है। उन्होंने संगठन के शांतिपूर्वक बहिष्कार आंदोलन का समर्थन किया है। इसके पूर्व अतिथियों ने दीप प्रज्जवलन कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। सभा को श्वेता लाभांते, राघव वैष्णव, मनोज जोषी, एल एन अग्रवाल ने भी संबोधित किया। संचालन मदनलाल मंडलोई ने किया एवं आभार प्रदीप मालवीय ने माना।
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