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सामान्य ज्ञान भाग 41 (महत्वपूर्ण तथ्य)

Friday, August 26, 2016

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सबसे बडा न्यूज पोर्टल भोपाल समाचार सप्ताह में एक दिन इतिहास सें संबंधित संक्षिप्त सामान्य जानकारी अपने नियमित पाठकों के विशेष आग्रह पर बीते साल से प्रकाशित की जा रही है। इसमें और क्या परिवर्तन किया जाये। पाठकगण अपने विचार सुझाव भोपाल समाचार की ईमेंल पर भेज सकते है।

1. औरंगजेब का जन्म 24 अक्टुबर 1618 ई0 को दोहाद (गुजरात) नामक स्थान पर हुआ था।
2. औरंगजेब के बचपन का अधिकॉश समय नूरजहॉ के पास बीता 18 मई 1637 ई0 को फारस के राजघराने की दिलरास बानो बेगम के साथ औरंगजेब का निकाह हुआ ।
3. आगरा पर कब्जा कर जल्दबाजी में औरंगजेब ने अपना राज्याभिषेक अबुल मुजफ्फर मुहउद्दीन मुजफ्फर औरंगजेब बहादुर आलमगीर की उपाधि से 31 जुलाई 1658 को करवाया देवराई के युद्ध में सफल होने के बाद 15 मई 1659 को औरंगजेब ने दिल्ली में प्रवेश किया और शाहजहॉ के शानदार महल में 5 जून 1659 को दूसरी बार राज्याभिषेक करवाया।
4. औरंगजेब के गुरू के थे। मीर मुहम्मद हकीम 
5. औरंगजेब सुन्नी धर्म को मानता था। उसे जिन्दा पीर कहा जाता था।
6. जयसिंह और शिवाजी के बीच पुरन्दर की संधि 22 जून 1665 ई0 को सम्पन्न हुई।
7. मई 1666 ई0 को आगरे के किले दीवाने आम में औरंगजेब के समक्ष शिवाजी उपस्थित हुएॅ यहॉ शिवाजी को कैद कर जयपुर भवन में रखा गया।
8. इस्लाम नही स्वीकार करने के कारण सिक्खो के 9 वे गुरू तेगबहादुर की हत्या औरंगजेब ने 1675 में दिल्ली में करवा दी थी।
9. औरंगजेब ने 1679 ई0 में जाजिया कर को पुनः लागू किया।
10. औरंगजेब ने बीबी का मकबरा का निमार्ण 1679 ई0में औरंगाबाद (महाराष्ट्र) में करवाया।
11. 1686 ई0 में बीजापुर एवं 1697 में गोलकुण्डा को औरंगजेब ने मुगल सामा्रज्य में मिला लिया।
12. मदन्ना एवं अकन्ना नामक ब्राह्यणो का संबंध गोलकुण्डा के शासक अबुल हसन से था।
13. औरंगजेब के समय हुएॅ जाट विद्रोह का नेतृत्व गोकुला एवं राजाराम ने किया था। 1670 ई0 में तिलपत की लडाई में जाट परास्त हुए। गोकुल को मौत के घाट उतार दिया गया। इसके बाबजूद जाटो ने 1685 ई0 में राजाराम के नेतृत्व में पुनः विद्रोह किया । इन जाटो ने सिकन्दरा में स्थित अकबर के मकबरे को भी लूटा। भरतपुर राजवंश की नीव औरंगजेब के शासनकाल में जाट नेता एवं राजाराम के भतीजा चूरामन ने डाली।
14. औरंगजेब के समय में हिन्दू मनसबदारों की संख्या लगभग 337 थी, जो अन्य मुगल सम्राटों की तुलना में अधिक थी। 
15. औरंगजेब का पुत्र अकबर ने दुर्गादास के बहकावे में आकर अपने पिता के खिलाफ विद्रोह किया। 
16. औरंगजेब ने कुरान काक अपने शासन का आधार बनाया। इसने सिक्के पर कलमा खुदववना, नवरीोज का त्योहार मनाना, भाँग की खेती करना, गाना बजाना ,झरोख, दर्शन, तुलादान प्रथा। (इस प्रथा में सम्राट को उसके जन्म हदन पर सोने चाँदी तथा अन्य वस्तुओं से तौलने की प्रथा थी। यह अकबर के जमाने मे प्रारंभ हुई थी।) आदि पर प्रतिबंध लगा दिया।
17. औरंगजेब में दरवार में संगीत पर रोक लगा तथा सरकारी संगीतज्ञों की अवकाश दे दिया गया। भारतीय शास्त्रीय संगीत पर  फारसी में सबसे अधिक पुस्तके औरंगजेब के ही शासन काल में लिखी गई। औरंगजेब स्वयं वीणा बजाने में दक्ष था। 
18. औरंगजेब ने 1665 ई0 में हिन्दू मंदिरों को तोडने का आदेश दिया। इसके शासन काल में तोडे गए मंदिरों में सोमनाथ का मंदिर, बनारस का विश्वनाथ मंदिर एवं वीर सिंह देव द्वारा जहाँगीर काल में मथुरा में निर्मित केशव राय मंदिर थे। 
19. औरंगजेब की मृत्यु 20 फरपरी 1707 ई0 को हुई। इसे खुलदाबाद जो अब रोजा कहलाता है में दफनाया गया। आ।रंगजेब के समय सूबों की संख्या 20 थी।
20. औरंगजेब दारूल बर्ह (काफिरों का देश) को दारूल इस्लाम (इस्लाम का देश) में परिवर्तित करने को अपना तहज्वपूर्ण लक्ष्य मानता था। 
नोट: औरंगजेब के शासन का मे मुगल सेना में सर्वाधिक हिन्दू सेनापति थे।
21. मंत्रिपरिषद् को विजारत कहा जाता था।
22. बाबर के शासनकाल में वजीर पद कफी महत्वपूर्ण था। 
23. सम्राट के बाद शासन के कार्यों को संचालित करने वाला सबसे महज्वपूर्ण अधिकारी वकील था। जिसके कर्तव्यों को अकबर ने दीवान, मीरबख्शी, सद्र-उस-सद्र एवं मीर समन में विभाजित कर दिया। 
24. औरंगजेब के समय में असद खान ने सर्वाधिक 31 वर्षों तक दीवान के पद पर कार्य किया। 
25. मीरबख्शी द्वारा सरखत नाम के पत्र पर हस्ताक्षर के बाद ही सेना को हर महीने वेतन मिल पाता था। 
26. जब कभी सद्र न्याय विभाग के प्रमुख का कार्य करता था, तब उसे काजी कहा जाता था। 
27. लगानहीन भूमि (मदद-ए-माश) का निरीक्षण सद्र करता था। 
28. सम्राट् के घरेलू विभागों का प्रधान मीर समान कहलाता था।

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