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इन्वेस्टर्स समिट: एक सवाल के 2 जवाब, घोटाला क्या है

Monday, August 1, 2016

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भोपाल. मप्र में विदेशी निवेश के लिए सीएम शिवराज सिंह चौहान शुरू से कवायद कर रहे हैं। वो विदेश जाते हैं, धूमधाम के साथ वापस आते हैं, तामझाम के साथ इन्वेस्टर्स मीट का आयोजन होता है परंतु निवेश अभी तक चवन्नी भी नहीं हुआ। अब तो एक नया सवाल उठ गया है। इन्वेस्टर्स समिट के खर्चों को लेकर उद्योग विभाग ने 2 विधायकों को 2 अलग अलग जवाब दिए। एक जवाब में खर्चा 22 करोड़ बताया गया है तो दूसरे में 14 करोड़। सवाल यह है कि क्या यह 8 करोड़ का घोटाला है या इससे भी कुछ ज्यादा का। 

पूर्व मंत्री बाबूलाल गौर और कैलाश चावला ने इन्वेस्टर्स समिट पर जो सवाल लगाए थे, उसमें उद्योग विभाग के अफसर बुरी तरह घिरे हैं। इन दोनों ही विधायकों को उद्योग अफसरों ने लिखित तौर पर दो साल पहले हुए समिट के खर्च की जो जानकारी दी है, उसकी राशि में 8 करोड़ रुपए का अंतर है। गौर को दी जानकारी में 22 करोड़ रुपए और चावला को 14 करोड़ खर्च बताया गया है।

प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार इंदौर समिट के लिए कैबिनेट की स्वीकृति के बाद सीआईआई को शामिल किया गया था जबकि दो अन्य एजेंसियों का चयन ओपन टेंडर के आधार पर किया गया था। इस राशि के खर्च के बाद भी प्रदेश में निवेश का रिजल्ट शून्य है। तीन सालों में यहां आने वाले किसी उद्योग के प्रतिनिधि ने एमओयू नहीं किया है।

विधायक चावला को यह जानकारी दी
विधायक कैलाश चावला ने वर्ष 2013 से अब तक हुए इन्वेस्टर्स समिट की जानकारी और खर्च के बारे में जानकारी मांगी तो सरकार ने उन्हें भी इंदौर समिट में आने वालों की संख्या 3500 ही बताई और कोई एमओयू नहीं होने की सूचना दी। इस समिट में शासन द्वारा खर्च राशि का ब्यौरा 14.28 करोड़ रुपए बताया गया है। इन्हें भी बताया गया है कि एक भी निवेशक ने न तो जमीन मांगी न उद्योग लगाने के लिए आगे आए हैं।

सवालों से बढ़ाई परेशानी
इंदौर में वर्ष 2014 में अक्टूबर में तीन दिनों तक चली ग्लोबल इंवेस्टर्स समिट में 3500 से अधिक डेलीगेट्स शामिल हुए थे। इस दौरान समिट का खर्च उठाने का काम जिन कम्पनियों को दिया गया, उसमें भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने 16.91 करोड़, जेडब्ल्यूटी ने 2.37 करोड़ तथा अंसर्ट एंड यंग (ई एंड वाय) ने 2.25 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इसके अलावा समिट के प्रचार प्रसार पर अखबारों, न्यूज चैनलों पर 1 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे। यह राशि 22.50 करोड़ रुपए से अधिक होती है।
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