दलितों की हड़ताल: मृत मवेशी नहीं उठाएंगे

Sunday, July 31, 2016

अहमदाबाद। दलित समुदाय के नेताओं ने अपने समुदाय के सदस्यों का आह्वान किया कि वे मृत मवेशियों को उठाने का काम छोड़ दें ताकि 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले भाजपा सरकार को ‘‘कड़ा संदेश’’ दिया जा सके। उन्होंने समुदाय के लोगों की प्रताड़ना बंद करने के लिए ठोस कदम उठाने की भी मांग की। इस बीच, गुजरात में लगातार जारी दलितों के प्रदर्शन के बीच उन 20 से ज्यादा नौजवानों में से एक ने आज दम तोड़ दिया जिन्होंने पिछले दिनों खुदकुशी की कोशिश की थी। 

रैली में दी चुनौती
गुजरात के दलित नेताओं ने यहां एक विशाल रैली में यह चेतावनी भी दी कि यदि दलित उत्पीड़न बंद नहीं हुआ तो वे 2017 के राज्य विधानसभा चुनावों में ‘‘अपनी ताकत दिखाएंगे ।’’ पुलिस ने कहा कि योगेश हीराभाई सोलंकी (25) को बीती रात तब राजकोट से अहमदाबाद सिविल अस्पताल लाया गया जब उसकी हालत काफी बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने के तुरंत बाद ही योगेश ने दम तोड़ दिया। 

ऊना में हुई थी युवकों की पिटाई
बीते 11 जुलाई को उना में एक मृत गाय की खाल उतारने के मुद्दे पर कुछ दलित युवकों की सरेआम हुई पिटाई के विरोध में 19 जुलाई को राजकोट के धोराजी तालुका के पाराबारी गांव में योगेश ने दो अन्य युवकों के साथ खुदकुशी की कोशिश की थी। 

एक पुलिसकर्मी की भी हुई थी मौत 
दलित प्रदर्शनकारियों की ओर से एक पुलिस थाने पर 19 जुलाई को किए गए पथराव में अमरेली शहर में एक पुलिसकर्मी की मौत हो गई थी। दलित समुदाय के लोगों पर हुए हमले के विरोध में लगातार जारी प्रदर्शनों के तहत हजारों दलितों ने साबरमती इलाके में एक विशाल सभा की। इस रैली में दलित नेताओं ने अपने समुदाय के सदस्यों की प्रताड़ना बंद करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की। 

मृत मवेशियों को उठाने से इनकार
दलित नेताओं ने यहां से गिर-सोमनाथ जिले के उना शहर तक पांच अगस्त से एक पैदल मार्च निकालने की योजना का ऐलान किया। उना में ही 11 जुलाई को दलित युवकों की सरेआम पिटाई की गई थी, जिससे देश भर में आक्रोश भड़क उठा था। रैली को संबोधित करते हुए दलित नेता एवं संयोजक जिग्नेश मेवानी ने राज्य सरकार के सामने कई मांगें रखीं और अपने समुदाय से प्रतिज्ञा करने को कहा कि वे मृत मवेशियों को उठाने के पारंपरिक काम से दूर रहेंगे। 

नेता ने दलितों से की अपील
मेवानी ने कहा, ‘‘सरकार को कड़ा संदेश देने के लिए मैं सभी दलितों से अपील करता हूं वे मृत मवेशियों को उठाने का काम बंद कर दें। मैं आपसे यह प्रतिज्ञा भी करवाना चाहता हूं कि आप अब सीवर लाइनों को साफ करने का काम नहीं करेंगे । हम अब इस काम को नहीं करना चाहते और चाहते हैं कि सरकार हमें खेती के लिए जमीन दे ताकि हम एक सम्मानित जीवन जी सकें ।’’ 

उन्होंने राज्य की भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘‘यदि दलितों पर अत्याचार बंद नहीं होता है तो दलित 2017 के विधानसभा चुनावों में अपनी ताकत दिखाएंगे ।’’ मेवानी ने वार्ता की मेज पर आने के लिए राज्य सरकार के समक्ष ठीक उसी तरह कई मांगें रखीं, जैसे आरक्षण आंदोलन के समय पटेल समुदाय ने रखी थीं। 

पासा के तहत आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग
उन्होंने कहा, ‘‘हम चाहते हैं कि उना में दलितों की पिटाई करने वालों को ‘पासा’ के तहत गिरफ्तार किया जाए । यदि वे जमानत पर बाहर आएं तो सरकार उन्हें पांच जिलों में दाखिल होने की इजाजत नहीं दे ।’’ ‘पासा’ असामाजिक गतिविधियों से निपटने वाला एक सख्त कानून है। 

फायरिंग की जांच कराने की मांग
उन्होंने मांग की कि हाल के प्रदर्शनों के दौरान दलितों पर दर्ज किए गए मामले वापस लिए जाएं और 2012 में थानगढ़ पुलिस फायरिंग की जांच तेजी से कराई जाए। थानगढ़ फायरिंग कांड में तीन दलित मारे गए थे । उन्होंने यह मांग भी की कि ऐसे दलितों को पांच-पांच एकड़ जमीन दी जाए जो अपने पारंपरिक काम को छोड़ना चाहते हैं और समुदाय के सदस्यों को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट का प्रशिक्षण दिया जाए। दलित नेताओं ने कहा कि सरकार उनकी मांगें जब तक नहीं मानती है तब तक प्रदर्शनों का दौर जारी रहेगा। 

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