लीजिए, मनरेगा का एक ऐसा महाघोटाला, जो कभी पकड़ा नहीं जाएगा

Thursday, July 28, 2016

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भोपाल। घोटाले तो हर रोज होते हैं, बड़े बड़े आईएएस अफसर घोटाले करते हैं, लेकिन वो कोई ना कोई गलती जरूर करते हैं, जिससे सारा खुलासा हो जाता है, लेकिन मनरेगा के तहत मप्र में इन दिनों कुछ इस तरह का घोटाला किया जा रहा है कि भारत में मौजूद कोई सरकारी ऐजेंसी नहीं जो इसे पकड़ पाए। यह इतना बिखरा हुआ और छोटे छोटे टुकड़ों में है कि इसे शायद कभी समेटा ही नहीं जा सकेगा। मप्र के रायसेन जिले में हुए इस घोटाले के कुछ प्रमाण भोपाल समाचार के पास उपलब्ध हुए हैं। हमारे समाचार मित्र ने नाम गोपनीय रखने का आग्रह किया है, इसलिए उनका जिक्र नहीं किया जा रहा। 

सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक द्वारा पहले अपने परिचित या जो रिश्वत के रूप में कुछ पैसे दें उनका कार्य पहले स्वीकृत किया जाता है एवं उस पर उसी के मजदूरों को काम दिया जाता है परन्तु काम मशीनरी द्वारा किया जा सकता है। उस कार्य को मशीन द्वारा 70 प्रतिशत पूर्ण कर लिया जाता है एवं 30 प्रतिशत कार्य मजूदरी से किए जाते हैं। एवं फर्जी तरीको से मजदूरों की हाजिरी लगाई जाती है। जिस मजदूर की हाजिरी लगाई जाती है उसे तो पता ही नही होता की उसके द्वारा किसी कार्य में काम किया है। सबसे ज्यादा फर्जी हाजिरी खेत सड़क योजना में लगी है। उसकी जॉच करानी चाहिए।

उदाहरण के तौर पर कपिलधारा कूप में कुआं 70 प्रतिशत जेसीबी से खोद दिया जाता है बाद में उसकी स्वीकृति होती है फिर मस्टररोल निकले जातेे रहते है जिसमें गावं के कुछ मजदूरों के नाम दर्ज किए जाते हैं। उन्हें मालूम ही नहीं होता कि उनका नाम दर्ज हो गया। ना वो काम करते और ना ही मजदूरी मांगते। फिर सरपंच, सचिव, ग्राम रोजगार सहायक लगभग 4 सप्ताह तक मजदूरी का भुगतान नहीं करते और एक ही खाते पर पूरे परिवार का मनरेगा में पंजीयन कर देते है जिससे एक ही खाते से पैसे निकलने में आसानी हो जाती है। दस्तावेजों में दर्ज किया जाता है कि परिवार के सभी सदस्यों ने काम किया और पैसा एक ही खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता है। बाद में पोस्ट आफिस या बैंक में 10 प्रतिशत का कमीशन देकर भुगतान निकाल लिया जाता है। 

उस मजदूर को पता ही नहीं चलता, जिसके लिए मजदूरी भेजी गई थी। उसे ना तो काम मिलता है और ना ही मजदूरी। सरकार समझती है भ्रष्टाचार रुक गया, पैसा डायरेक्ट ट्रांसफर हो रहा है। इधर पूरा घोटाला आसानी से हो जाता है। आप चाहे तो मनरेगा की साईट पर जाकर संबंधित मजदूरों के खातों से संबंधित जानकार देख सकते है।

उदाहरण के तौर पर आप देख सकते है कि जॉबकार्ड क्रमांक एक 20.ब् पर पांच सदस्य है पर एक ही खाता खोला गया है। उसका पंजीयन किया गया है। इन्हे मालूम ही नहीं है कि कब काम मिला, कब काम किया और कब मजदूरी मिल गई। 
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